जल को बचाने के लिए गांव गांव, शहर शहर जा रहे हैं : सुभाष नोहवार

पायल गुप्ता (वीर सूर्या टाइम्स )
जो व्यक्ति समाज के उत्थान के लिए कार्य करते हैं उन व्यक्तियों को समाज हमेशा याद करता है l वही व्यक्ति आगे चलकर इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में स्थान पाते हैं l समाज का बच्चा-बच्चा उन्हें याद करता है और उनका अनुसरण भी करता है l हम बात कर रहे हैं। जल पुरुष समाजसेवी सुभाष नोहवार की। सुभाष नोहवार गांव मानागढ़ी के निवासी हैं जो उत्तर प्रदेश के जिला मथुरा में स्थित है । सुभाष पहले ही वह बिजली, पानी, सड़क, तालाब मेला मंदिर आदि समाज सेवा में अपना योगदान देते आ रहें है।
असाधारण व्यक्तित्व के लिए आज समाज का बच्चा-बच्चा उनको याद करता है l वह एक ईमानदार,कर्मठ, व शिक्षित, अन्ना हजारे,नेतृत्वकर्ता के रूप में लोग याद करते है। क्षेत्रीय लोग अन्ना हजारे के रूप में देखते है क्योंकि अन्ना हजारे जी दिल्ली के राम लीला मैदान में आंदोलन शुरू किया था । तब सुभाष दिल्ली से लगभग 120 किलो मीटर दूर अपनी जन्मभूमि मानागढ़ी मथुरा से चलकर इस आंदोलन में भाग लिया था। सुभाष से अन्ना हजारे के समर्थन में सन 2012 बारे में पांच दिवसीय आमरण अनशन अपने क्षेत्र में किया था । उसी दिन से सुभाष को क्षेत्र में अन्ना के नाम से जाना जाता है।

कहते हैं कि किसी कार्य को मिलकर पूरे मन से किया जाए तो उसके बाद जो सफलता की खुशी मिलती है उसकी खुशी को पैसों से भी नहीं खरीदी जा सकती है। कुछ इसी तरह का काम सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष ने किया।

आज हम बात करने जा रहे हैं बिहार के दशरथ मांझी की नही बल्कि उत्तर प्रदेश के भगीरथ की। उत्तर प्रदेश जिला मथुरा के गांव मानागढ़ी रहने वाले साधारण व्यक्ति की।
हमारी टीम दिल्ली से चलकर यमुना एक्सप्रेस वे से मथुरा जिले के बाजना कट उतर कर एक छोटे से कसवा रूप में बसे गांव मानागढ़ी का रुख किया।
बाजना से मानागढ़ी की दूरी 8,700 मीटर थी बाजना से तीन किलोमीटर की दूरी पर नहर मिली और हमने वहां अपनी गाड़ी रोकी और कुछ किसान,मजदूर व्यक्ति मिले ओर जानकारी लेना शुरू किया तो उन्होंने अपना गांव कटेलिया बताया।कटेलिया गांव के चौधरी जगवीर सिंह से पूछा कि कटेलिया की नहर में पानी कब से नहीं आया तो बताया कि हमने पहले कभी इस मे पानी आते नहीं देखा। लेकिन पिछले 4 साल से सुभाष के प्रयासों द्वारा पानी आना शुरु हुआ है। जब उनके गांव पहुँचे तो वह गांव की गलियों में छोटे-छोटे बच्चों के साथ पानी बचाओ बैनर लेकर रैली निकाल रहे थे। जब हमने उनसे बातें की और पूछा कि आप क्या कार्य करते हैं तो उन्होंने बताया कि खेती और मजदूरी का कार्य करता हूँ।

सुभाष को पानी के संकट ने बनाया जागरूक पुरुष बनाया ।
घंटो घंटो लाइन में लगकर मीलों दूर से पनिहारी के समूह के समूह खेतों में पगडंडी पर सर्दी,गर्मी और बरसात में आते देख विचलित हुए।
मानागढ़ी निवासी सामाजिक व्यक्ति 12-14 साल पहले जब उन्होंने अपने गांव की महिलाओं को पानी के लिए पड़ोसी जिले अलीगढ़ की सीमा तक मिलों दूर चल कर जाते देखा। कोई सिर पर रखकर कर लाता था तो कोई बैलगाड़ी में पानी के बर्तन भर कर लाता कई कई घंटों पानी के लिए ग्रामीणों को जाया जा रहा था
किलोमीटर दूर पैदल चलकर महिलाओं को भीषण गर्मी में पानी लाना पड़ता था इस दृश्य को देख कर
तब उनके मन में जल संरक्षण का ख्याल आया।
जल संरक्षण की अलख जगा रहे सुभाष नौहवार। 
फिजूलखर्ची रोकने लोगों को बता रहे पानी का महत्व  

  • जल ही जीवन है, जल है तो कल है। लोगों को जागरूक करने के लिए यह स्लोगन अक्सर सार्वजनिक स्थानों, पानी की टंकी, सरकारी भवनों पर लिखे रहते है लेकिन हकीकत में इस पर कोई अमल नहीं हो रहा है। ऐसे में जल संरक्षण की इस मुहिम को शहर शहर गांव गांव गलियों गलियों में घर-घर पहुंचाने के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता सुुुभाष नौहवार अलख जगा रहे हैं और पानी की बर्बादी रोकने और पानी के महत्व के बारे में लोगों को समझा रहे हैं। मथुरा जनपद के अंतिम छोर पर बसे गांव मानागढ़ी में रहने वाले सुभाष नौहवार साधारण किसान हैं और मजदूरी का कार्य करते हैं, लेकिन वह सामाजिक कार्याे में सबसे ज्यादा सहयोग करते हैं। बिना वजह पानी को बर्बाद होते देखकर उनके मन में एक टीस उठती थी। जिसे देख कर उन्होंने पानी की बर्बादी रोकने के लिए एक मुहिम छेड़ने का निश्चय किया। इसके साथ ही वह जल संरक्षण की अलख जगाने में जुट गए। सबसे पहले उन्होंने जल संरक्षण को अपने घर, गांव से प्रारंभ कर लोगों को जागरुक करना शुरु किया। अब वह पड़ोसी जनपद के गांवों में भी जल संरक्षण की अलख जगा रहे है। कुछ दिनों पहले वह दक्षिण भारत के मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, समुद्र के तटीय शहर बेंगलुरु, विशाखापट्टनम, चेन्नई आदि राज्यों में वह पानी की बेवजह बर्बादी रोकने और पानी की टोटियों को इस्तेमाल के बाद खुला न छोड़ने की सीख दे रहे है। इस मुहिम के लिए उन्होंने पोस्टर व बैनर बनवा रखे है। स्कूल, चौपाल गली चौराहे व बाजार में लगाकर लोगों को बता रहे है कि आने वाली पीढ़ी के लिए जल संरक्षण करना कितना जरूरी है। उनके प्रचार व प्रयास तारीफ करते हुए तमाम लोग पानी की फिजूलखर्ची रोकने के लिये उनकी मुहिम पर अमल कर रहे है। सुभाष नौहवार बताते हैं कि वह पिछले करीब दस साल से जल संरक्षण की मुहिम चला रहे है। वह इस अभियान में किसी से कोई चंदा तक नहीं ले रहे हैं, सभी खर्च अपने पास से कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्षा जल संचयन के साथ तालाब आवाम की ही नहीं पशु-पक्षियों की भी प्यास बुझाते हैं। इसलिए वह तालाब व पोखरों के संरक्षण के साथ खुदाई व साफ-सफाई का भी अभियान चला रहें हैं।

गंग नहर के पानी के लिए भीषण गर्मी में चले 24 किलोमीटर पैदल।
क्षेत्र में बड़ी समस्या थी डार्क जोन इससे किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन नहीं मिलता था घटते हुए जलस्तर को लेकर चिंतित था। क्षेत्र के डार्क जोन में शामिल होने से यहां के किसानों को बिजली के टूवेल का कनेक्शन नहीं मिल रहे थे।सिंचाई के संसाधन की कमी से किसान पूरा उत्पादन नहीं ले पा रहे थे। बड़ी समस्या थी डार्क जोन सुभाष ने बताया कि खुर्जा डिवीजन के जेवर रजवाहा से निचले हिस्से से पाँच माइनर निकलती हैं जट्टारी माइनर,ऊंटा सानी माइनर,मादक माइनर,गौरोला माइनर,कोलाना माइनर इन पाँचों माइनरों की टेल भाग मथुरा जिले के नौहझील ब्लॉक की सीमा में हैं। इन पाँचों माइनरों में 2016 से पहले कभी टेल पर किसानों को सिंचाई करने के लिए पानी नहीं मिलता था। सन 2016,17 और 18 में भीषण गर्मी में 24 किलोमीटर पैदल चलकर मानागढ़ी से खैर तहसील के गांव सालपुर के धरने में भूखे प्यासे भीषण गर्मी में चलकर धरने को देते थे समर्थन। क्षेत्र में सिंचाई के पानी की काफी समस्या थी।2016 में 28 दिन चला था धरना प्रदर्शन 2017 में17 दिन चला और 2018 में 10 दिन चला था धरना प्रदर्शन 3 साल तक चला और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन पर करते थे धरने को समाप्त। टप्पल और नौहझील क्षेत्र को ऊपरी मांट ब्रांच गंगा नहर खुर्जा डिवीजन से पानी मिलता है।
गौरोला माइनर मैं 25 साल बाद आया था पानी ।
अलीगढ़ एवं मथुरा के सीमावर्ती गांव से सटे गौरोला माइनर में 25 साल बाद पानी न आने के कारण किसानों के आगे सिंचाई की समस्या थी।नौहझील ब्लॉक के डार्क जोन में होने के कारण सिंचाई के लिए पानी का इंतजाम किसानों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत थी। सामाजिक सुभाष नौहवार के प्रयासों से 25 साल बाद इस माइनर में पानी आने से किसानों में हर्ष की लहर है। इस इलाके में सिंचाई करने के लिए नहर और रजवाहा ही साधन है। सामाजिक कार्यकर्ता खुदाई,सफाई कार्य प्रारंभ के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को लगातार प्रार्थना पत्र देते रहे। खुर्जा डिवीजन के पूर्व एसडीओ सुरेश चंद अग्रवाल ने माइनर की सफाई करने और पानी छोड़ने जाने का सहयोग किया।
सामाजिक कार्यकर्ता को शिकायत करने पर धमकी दे रहे कब्जाधारी।
गोरोला माइनर केे टेल पर कुछ स्वार्थी किसानों ने कब्जा कर लिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा अधिकारियों से शिकायत करने पर कब्जाधारी धमकी दे रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार ने भागदौड़ कर जेवर रजवाह से आ रही गोरोला माइनर की सफाई, खुदाई कराई थी। 5-4 किलोमीटर लंबी इस माइनर में पानी आने लगा था। किसानों ने कहा कि आगे रास्ता ना होने की वजह से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इसके बाद गौरोला माइनर की टेल तक खुदाई कराने मांग की गई थी। यह माइनर अभयपुरा गांव के तालाब तक जा रही है। लेकिन कुछ किसानों ने माइनर की जमीन पर कब्जा कर अपने खेत में मिला लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार का कहना है कि उनके करीब आठ वर्ष तक भागदौड़ पर गोरोला माइनर में पानी आया था लेकिन कुछ किसानों ने उनकी मेहनत पर पानी फेरते हुए टेल के नजदीक माइनर की जमीन पर कब्जा कर लिया है। उधर सींचपाल ने इस बाबत माइनर की जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। जिसे देख कर माइनर पर कब्जा कर रखे लोग शिकायत कर्ता पर शिकायत वापिस लेने का दबाव देते हुए उन्हें देख लेने की धमकी दे रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ने अधिकारियों से इस माइनर की जमीन को कब्जा मुक्त करने की कार्रवाई की मांग की थी।
भागीरथ ने जान की परवाह ना करते हुए भू माफियाओं से माइनर को मुक्त कराने की लड़ी लड़ाई।
दरअसल खुर्जा डिवीजन के जेवर राजबहा से निकली गौरोला माइनर की टेल के समीप दबंग किसानों ने कब्जा कर रखा था जिससे पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा था गौरोला माइनर गांव अभयपुरा के तालाब तक जा रही थी लेकिन इससे पहले मानागढ़ी, रामगढ़ी के मध्य कुछ किसानों ने माइनर की जमीन पर कब्जा कर उसे खेत में मिला लिया। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार ने बताया कि एक समय भूमाफिया इतने हावी हो चुके थे उनको मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न करने लगे और घरवालों से शिकायत करने लगे।
सुभाष मीडिया से बात करते हुए भावुक।
जल पुरुष भावुक होते हुए मीडिया को बताया कि वह दिन मुझे याद है जब घरवालों ने फटकार लगाते हुए घर से भाग जाने को कहा मैंने समाज की सेवा के लिए दर-दर की ठोकरें खाई थी 2 दिन तक भूखे प्यासे रहकर दर-दर की ठोकरें खाता रहा। मानसिक संतुलन खराब होने के कारण जिसके चलते मैंने कुछ दिनों के लिए गांव ही छोड़ कर चला गया। उस समय माइनर पर कब्जा जमा रहे कब्जा धारियों की सारी जानकारी मैंने सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र सिंह फोगाट दी। तो उन्होंने कहा कि आपकी समस्या का समाधान करते हुए माइनर को शीघ्र ही मुक्त करा दिया जाएगा और भू माफियाओं पर विभागीय कार्यवाही की जाएगी और टेल तक किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।गौरोला माइनर में 42 सालों बाद टेल पर पानी आया था।
ऐसा ही उटासानी माइनर में हुआ था।
41 सालों बाद मथुरा की सीमा में पानी आया था।

भागीरथ लेकर आया गांव में गंगा का पानी।

मथुरा जिले के अंतिम छोर पर बसा तिलकागढ़ी गांव के किसान कर रहे हैं फसल में नहर के पानी से सिंचाई। उटासानी माइनर में पिछले 41 सालों से पानी नहीं आया था लंबे समय से पानी आने के कारण यह माइनर लुप्त हो चुकी थी। सरकारी जमीन पर दबंग लोगों द्वारा अपने खेतों में मिलाकर कब्जा कर रखा था। एक सामाजिक व्यक्ति द्वारा शिकायत करने पर सरकारी जमीन को मुक्त करते हुए फिर से वहां नहर बनाई गई। रामधारी सिंह दिनकर की कविता में लिखा है।मानव जब जोर लगाता है पत्थर पानी बन जाता है, इस ही कुछ जल पुरुष समाजसेवी के द्वारा देखने को मिला।सिंचाई विभाग के खुर्जा डिवीजन में जेवर रजवाह से निकली ऊंटासानी माइनर अलीगढ़ बार्डर से होकर मथुरा के तिलकागढ़ी गांव तक आ रही है। माइनर में पिछले करीब चालीस वर्ष से टेल तक पानी नहीं आ रहा था। गांव मानागढ़ी के सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार पिछले करीब पांच वर्ष इस माइनर में टेल तक पानी के लिए रात दिन प्रयासरत थे। पंद्रह किलोमीटर लंबी माइनर में 7,8 किलोमीटर तक ही पानी आ पाता था। उनके निरंतर प्रयास से माइनर में धीरे-धीरे पानी आगे बढ़ता रहा और आज पूरे पंद्रह किलोमीटर लंबी माइनर के टेल तक पानी पहुंच गया। सुभाष नौहवार ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र फोगाट का उन्हें पूर्ण सहयोग मिला। इनके सहयोग से इस  माइनर में टेल तक पानी लाने में कामयाब हो सके। सोमवार को माइनर में टेल तक पानी देखकर एक बार तो किसानों को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। जब माइनर में पानी लगातार चलने लगा तो किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। और किशोर बोतलों में भरकर गंगाजल को अपने घर ले जाने लगे और ग्रामीणों में इतनी खुशी हुई कि वह जोर-जोर से सामाजिक कार्यकर्ता के जयकारे लगाते हुए फूल मालाओं से स्वागत करने लगे। गांव तिलकागढ़ी के प्रधान प्रतिनिधि छीतर सिंह ने सुभाष नौहवार के इस कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयास से इस माइनर का सूखा खत्म हो सका है। इस माइनर में टेल तक पानी आने से तिलकागढ़ी समेत आसपास गांवों के किसान सिंचाई के लिए लाभांवित होंगे। ऐसा ही कई ऐतिहासिक कार्य पूर्व में भी कर चुके हैं। आज सुभाष नौहवार को क्षेत्र की जनता अन्ना हजारे एवं जलपुरुष वा भागीरथ के नाम से पुकारते हैं।
आज इन पांचों माइनरों में पानी टेल तक मिल रहा है। जो कि पहले कभी नहीं मिला है।

समाजसेवी द्वारा एक और सराहनीय कार्य किया गया।

मथुरा के गांव मानागढ़ी
के प्राचीन देव छठ मेले में असामाजिक तत्व के लोगों के चलते मेले की आस्था में भारी गिरावट देखने को मिल रही थी जिससे माताएं बहन आए वाह माताएं बहना एवं श्रद्धालु आना काफी कम हो गया था और दुकानदारों के साथ भी कुछ शरारती तत्व हरकत करते थे जिसके चलते प्रतिवर्ष मेरे में गिरावट दिख रही थी इसे देख मेरे मन में एक टीस उठी की क्यों ना इस मेले को एक भव्य रुप में प्रकाशित किया जाए इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार ने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर मेले में समुचित व्यवस्था की मांग की थी जिसके चलते आज मेले को एक भव्य रूप में आयोजित किया जाता है। खोया हुआ अस्तित्व पुनः वापस लाने में सामाजिक कार्यकर्ता की अहम भूमिका रही जिसके चलते ग्रामीणों ने देख उनकी सराहना करते हुए आज गांव में युवा संगठन ने उनका साथ दिया। मानागढ़ी के देव छठ मेले को लेकर सन 2014 में लिखा था जिला अधिकारी को पत्र सुभाष निवारने उसकी आस्था को उसकी आस्था में गिरावट देख सुभाष नगर को बड़ी 30 हो रही थी इस चीज को सहन ना करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ने सन 2014 से जिलाधिकारी महोदय को पत्र लिखकर मेले की समुचित व्यवस्था कराने के संबंध में प्रार्थना पत्र देते हुए आए हैं
कहते हैं ना किसी कार्य को मिलकर पूरा मन से किया जाए तो उसके बाद जो सफलता की मिलती है उसकी खुशी पैसों से भी नहीं खरीदी जाती जा सकती है कुछ इसी तरह का काम सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नगर भागीरथ के प्रयासों में सफल रहा सामाजिक व्यक्ति 12 वर्ष पहले सन2010में माइनर में पानी लाने के लिए जिला मुख्यालय के कार्यालय पर गए थे सफलता की खुशी कुछ अलग ही होती है वह पैसों से भी अधिक क्षेत्र में किसी तरह की समस्या होती तो वह उस समस्या का समाधान कराने की पूरी कोशिश करते लोग उन्हें जल पुरुष के नाम से जानते भी है

सुभाष का एक और सराहनीय कार्य।
मानागढ़ी से नोएडा के लिए रोडवेज बस सेवा प्रारंभ।
जनपद के अंतिम छोर पर बसे गांव मानागढ़ी से नोएडा होकर दिल्ली गाजियाबाद के लिए रोडवेज बस सेवा शुरू हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार और कौशांबी डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक शिव बालक ने हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया। कौशांबी डिपो की रोडवेज बस गांव मानागढ़ी से नोएडा होकर दिल्ली गाजियाबाद तक चलेगी। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक शिव बालक ने सोमवार को गांव मानागढ़ी के लिए हरी झंडी दिखा कर रोडवेज बस को रवाना किया। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष नौहवार ने बताया कि बाजना मानागढ़ी क्षेत्र को एनसीआर से जोड़ने के लिए काफी लंबे समय से प्रयास कर रहे थे। इस सुविधा से क्षेत्र की जनता को लाभ मिलेगा। नोएडा दिल्ली गाजियाबाद मेरठ जाने को आसान होगा। सुभाष नौहवार ने बताया कि मानागढ़ी से मथुरा व भरतपुर के लिए पहले से बस चल रही है।

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