पिछले 20 वर्षों से लगातार छत्रपाल सिंह सूर्यवंशी बाल्य काल से ही स्वयंसेवक संघ के साथ भाजपा के अन्य पदों कार्यरत रहें हैं सामाजिक संगठनों में बढ़ चढ़कर हमेशा हिस्सा लेते रहें इन्ही कुछ चर्चा के साथ विश्व गुरु भारत के संवाददाता मनीष सूर्यवंशी ने छत्रपाल सूर्यवंशी से बातचीत की

छत्रपाल सूर्यवंशी जी भाजपा के नेता कहते हैं अन्य पार्टियों ने तब से देश आजाद हुआ है कुछ नहीं किया जो किया है भाजपा ने किया है क्या आपको लगता है भाजपा की केंद्र की सरकार और राज्यों की सरकार नें जो अंतिम छोर पर गरीब व्यक्ति है उसे लाभ मिल हैं

उत्तर :
देखिए पत्रकार महोदय
देश में जब भी सामाजिक-आर्थिक चिंतन की बात की जाती है तो गांधी, जे.पी.-लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय जी का नाम लिया जाता है। गांधी जी ने आजादी की लड़ाई लड़ी, जे.पी. जी ने आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ी, लोहिया जी समाजवादी चेतना के संवाहक बने और दीनदयाल जी स्वदेशी आधारित सामाजिक-आर्थिक चिंतन के सर्वश्रेष्ठ चिंतक बने।

दीनदयाल जी का अध्ययन स्वदेश में हुआ, इसलिए उनके मूल में स्वदेशी चिंतन प्राकृतिक रूप से स्वदेशी चिंतक थे
भारत के श्रेष्ठ विचारकों में हम दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद का अध्ययन करते हैं तो हम पाते हैं कि वह भारत की चित्ति,
भारत के जनमानस और भारत की संस्कृति को समझ समस्याओं के समाधान के लिए सदैव अग्रसर रहें ।
यही कारण है कि दीनदयाल जी कल भी प्रासंगिक थे, आज भी हैं और विश्व राजनीतिक फ़लक पर उनका एकात्म-दर्शन भी प्रासंगिक रहेगा।

अगर हम गौर से देखें तो हम पाएंगे कि हर विचारक का एक शब्द प्रिय होता है,जैसे गांधी जी का ‘अहिंसा’, नेहरू जी का ‘आराम-हराम’, लोहिया जी का ‘चौखंभा राज्य’, जयप्रकाश जी का ‘संपूर्ण क्रांति’, शास्त्री जी का ‘जय जवान-जय किसान’।
इसी तरह दीनदयाल जी का प्रिय शब्द रहा ‘अंत्योदय’, अंत्योदय यानी अंतिम व्यक्ति का उदय। मैं आपको पहले ही बता चुका हूं मैं बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक सिपाही रहा हूं पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूजी कल्याण सिंह जी का विचारक रहा हूँ दीनदयाल जी की सोच थी अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंच जाए और उस व्यक्ति को कैसे लाभ मिले में
बुलंदशहर के अनेकों गांव में मोदी, योगी सरकारों की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक भाजपा का निष्ठावान , ईमानदार कार्यकर्त्ता लाभ दिलवाने का काम किया है
अंत्योदय में यह बात स्पष्ट है ‘सबका साथ, सबका विकास’। जब अंतिम व्यक्ति का विकास होगा तो उसके ऊपर सभी व्यक्तियों का विकास होग़ा ।
जिस देश के आर्थिक चिंतन में अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का उदय न हो, वह राष्ट्र न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी भटक जाता है। अंत्योदय सामाजिक कर्तव्य की प्रेरणा की पहल है। सर्वकल्याणकारी, सर्वस्वीकारी और फलकारी है।
अंत्योदय के मूल में दीनदयाल जी ने कोई चुनावी लाभ नहीं देखा क्योंकि उनका जीवन स्वत: अंत्योदय से प्रेरित था । उनके शब्द और आचरण में दूरी नहीं थी। वर्षों के चिंतन के बाद उन्होंने पाया कि भारतीय जीवन और सांस्कृतिक चेतना को जमीन पर उतारने के लिए अगर नीति अंत्योदय आधारित नहीं होगी तो हम भारतीय संस्कृति, सद्भाव, गांव की आत्मा और शहरी आवश्यकता से कोसों दूर चले जाएंगे। दीनदयाल जी के अंत्योदय का आशय राष्ट्रश्रम से प्रेरित था। वह राष्ट्रश्रम को राष्ट्रधर्म मानते थे। उनकी मान्यता रही कि राष्ट्रश्रम प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रधर्म है। अत: कोई श्रमिक वर्ग अलग नहीं है, हम सब श्रमिक हैं। अत: राष्ट्रश्रम राष्ट्रधर्म का दूसरा नाम है।
छत्रपाल सिंह ने आगे कहा मुझे कोई संकोच नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंत्योदय शब्द की अपनी गरीबोन्मुखी योजनाओं से उसे साकार करने की दिशा में एक नहीं अनेक साहसिक निर्णय लिए हैं।
मसला जनधन योजना का हो, उज्ज्वला योजना हो, आयुष्मान योजना हो, शौचालय योजना हो, प्रधानमंत्री आवास योजना हो, मुद्रा योजना हो, स्वच्छता अभियान हो, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी को लेकर पैंशन की अनेक योजनाएं, गरीब किसानों के खाते में छह हजार रुपए वार्षिक भेजने, इसके साथ ही ठेले-खोमचे लगाने वालों से लेकर गरीबों की जिंदगी में मुद्रा योजना के माध्यम से परिवर्तन लाने की अहम योजना। ऐसी अनेक योजनाएं लागू हुईं, जिनसे सौ करोड़ से अधिक भारतीयों के जीवन पर सीधा असर पड़ा। सरकार वही अच्छी होती है, जिसकी किरणें ‘अंत्योदय’ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में नया सवेरा लाए और वह मात्र मोदी जी की सरकार है योगी जी की सरकार है
जो अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का काम कर रही है
देखिए हर बर्ष की तरह इस बार भी 23 सितम्बर सूर्यवंशी दिवस मना रहें हैं शिकार पुर में आप सभी लोंग आमंत्रित हैं

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