नई दिल्ली (वीर सूर्या टाइम्स)।
बांगलादेश में हिंदू समुदाय के विरुद्ध लगातार हो रही हत्याओं, धार्मिक उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नवीन शाहदरा क्षेत्र में एक जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और राष्ट्रवादी शिवसेना के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
प्रदर्शन के दौरान संयुक्त राष्ट्र (यू.एन.ओ.) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, भारत सरकार के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, विदेशमंत्री, बांगलादेश के प्रधानमंत्री तथा बांगलादेश उच्चायोग को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में बांगलादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राष्ट्रवादी शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने कहा कि बांगलादेश में हिंदू समुदाय भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि आए दिन हो रही हत्याएं, लूटपाट, धार्मिक स्थलों पर हमले और उत्पीड़न मानवता को शर्मसार करने वाले हैं। हाल की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि वहां स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है।
जय भगवान गोयल ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मानवाधिकारों की रक्षा करने वाले वैश्विक मंच अल्पसंख्यक हिंदुओं की पीड़ा पर मौन हैं, तो यह उनके दोहरे मापदंडों को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि यू.एन.ओ. बांगलादेश सरकार पर दबाव बनाकर हिंदुओं की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित कराए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
उन्होंने भारत सरकार से भी अपील की कि वह बांगलादेशी हिंदुओं के मुद्दे पर सख्त कूटनीतिक रुख अपनाए और उत्पीड़न के शिकार हिंदुओं को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के अंतर्गत संरक्षण प्रदान करे। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि विश्व के किसी भी कोने में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध वह मजबूती से खड़ा रहेगा।
इस मौके पर बड़ी संख्या में सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें राधाकांत वत्स, मनदीप गोयल, धर्मेंद्र बेदी, अवध कुमार, सुबोध बिहारी, प्रेमचंद गुप्ता, शंकर लाल अग्रवाल, डॉ. जितेंद्र यादव, विपिन पूरन सिंह सहित कई प्रमुख नाम शामिल रहे।
प्रदर्शन के अंत में यू.एन.ओ. और भारत सरकार से मांग की गई कि बांगलादेश में हिंदुओं के विरुद्ध हो रहे अत्याचारों पर तत्काल कार्रवाई कर पीड़ित समुदाय को न्याय और सुरक्षा प्रदान की जाए।

