दिल्ली। SC/ST (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि केवल गाली-गलौज करने मात्र से SC/ST एक्ट अपने आप लागू नहीं होता। किसी SC/ST व्यक्ति को अपशब्द कहना तभी इस कानून के दायरे में आएगा, जब जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उसे जाति के आधार पर अपमानित करने या नीचा दिखाने की मंशा स्पष्ट हो।
यह टिप्पणी जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने मामले में अपीलकर्ता के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आदेश दिया।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि न तो एफआईआर और न ही आरोप पत्र में यह स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता को उसकी जाति के कारण अपमानित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि SC/ST एक्ट का उद्देश्य जाति के आधार पर किए जाने वाले गंभीर अत्याचारों को रोकना है, न कि हर सामान्य विवाद या गाली-गलौज के मामलों में इसका दुरुपयोग किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई तभी की जा सकती है, जब आरोपों से स्पष्ट रूप से यह सिद्ध हो कि अपमान या उत्पीड़न जाति को आधार बनाकर किया गया हो।

