पायल गुप्ता (वीर सूर्या टाइम्स)
नई दिल्ली। शाहदरा जिले की साइबर थाना पुलिस ने घरेलू सहायिका (हाउस मेड) उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, रबर स्टांप, एजेंसी के पंपलेट, रजिस्ट्रेशन दस्तावेज और नकद रसीदें बरामद की हैं।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता शालिनी मेहता ने ऑनलाइन माध्यम से “कुमार नरसिंह ब्यूरो एंड प्लेसमेंट सर्विस” से घरेलू सहायिका रखने के लिए संपर्क किया था। एजेंसी द्वारा झानवी नामक युवती को उनके घर भेजा गया और पुलिस वेरिफिकेशन व एग्रीमेंट कराने का भरोसा दिलाया गया। इस दौरान एजेंसी ने शिकायतकर्ता से ₹20,000 ऑनलाइन और ₹13,000 नकद सहित कुल ₹33,000 वसूल लिए।
कुछ दिनों बाद 21 मई 2026 को झानवी बिना किसी सूचना के घर से गायब हो गई। शिकायतकर्ता द्वारा एजेंसी से संपर्क करने पर पहले नई मेड भेजने का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में एजेंसी संचालकों और मेड के मोबाइल फोन बंद हो गए। इसके बाद पीड़िता ने साइबर थाना शाहदरा में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच के लिए साइबर थाना शाहदरा की विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान मोबाइल नंबर, आईएमईआई डेटा, डिजिटल फुटप्रिंट और बैंक लेनदेन की गहन पड़ताल की गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने हिताई मुखिया (36 वर्ष), निवासी मधुबनी, बिहार और झानवी कुमारी (22 वर्ष), निवासी गुमला, झारखंड को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी “कुमार नरसिंह ब्यूरो एंड प्लेसमेंट सर्विस” और “एच.के. मैनपावर कंसल्टेंसी” के नाम से फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियां संचालित कर रहे थे। ये लोग मेड उपलब्ध कराने, एग्रीमेंट और पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर अग्रिम राशि वसूलते थे। इसके बाद झानवी को कुछ दिनों के लिए ग्राहक के घर भेजा जाता था और फिर उसे वापस बुलाकर दूसरे घर भेज दिया जाता था। इस तरह एक ही मेड का उपयोग कर कई लोगों से ठगी की जाती थी।
पुलिस को आरोपियों के पास से 3 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड, एक एटीएम कार्ड, एजेंसी के पंपलेट, दो रबर स्टांप, रजिस्ट्रेशन फॉर्म और नकद रसीदों के बंडल बरामद हुए हैं। बरामद दस्तावेजों के आधार पर पुलिस अन्य पीड़ितों और गिरोह से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।
शाहदरा जिला पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि घरेलू सहायिका या अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति करते समय एजेंसी की विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें और बिना सत्यापन के किसी को अग्रिम भुगतान न करें।

