रामलीला मैदान में 30 नवंबर की भीम रैली पर विवाद; डोमा परिसंघ ने उठाए अनुमति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

नई दिल्ली। दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी संगठनों के परिसंघ (DOMA) द्वारा 30 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित की जाने वाली वार्षिक भीम रैली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि फर्स्ट-कम फर्स्ट-सर्व के परंपरागत नियम को इस बार दरकिनार कर दिया गया और उनकी जगह पंजाबी अकादमी के आवेदन को प्राथमिकता देकर दिल्ली पुलिस ने उनकी अनुमति निरस्त कर दी।

DOMA के अनुसार, 4 जुलाई 2025 को उन्होंने रामलीला मैदान बुक करने के लिए एमसीडी के असिस्टेंट डायरेक्टर (हॉर्टिकल्चर), सिटी जोन को आवेदन दिया था। कोई जवाब न मिलने पर 2 सितंबर को पुनः पत्र दिया। इसके बाद 5 सितंबर को एमसीडी ने लिखित रूप से बताया कि 29–30 नवंबर को मैदान खाली है और दिल्ली पुलिस से एनओसी लेकर आयोजन किया जा सकता है।
DOMA ने 9 सितंबर को डीसीपी सेंट्रल, दरियागंज से अनुमति मांगी, लेकिन 13 नवंबर को यह कहते हुए एनओसी रद्द कर दी गई कि मैदान 4 से 30 नवंबर तक पंजाबी अकादमी द्वारा पहले से बुक है।

संगठन का कहना है कि पंजाबी अकादमी ने अपना आवेदन 16 अक्टूबर को दिया था, जो DOMA की बुकिंग से लगभग ढाई महीने बाद का है।
“यह साफ़ है कि नियमों की अनदेखी कर हमारे कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की गई,” संगठन ने कहा।

DOMA ने यह भी दावा किया कि विरोध के बाद पंजाबी अकादमी ने अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया, फिर भी पुलिस मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट का हवाला देकर अनुमति देने से बच रही है। संगठन ने तर्क दिया कि रामलीला मैदान और पोलिंग बूथ वाले स्कूल के बीच डबल रोड है, इसलिए मैदान के अंदर आचार संहिता लागू नहीं होती और इसी मैदान में पहले धार्मिक कार्यक्रम को एनओसी दी जा चुकी है, जबकि उनका आयोजन पूरी तरह “सामाजिक” है।

DOMA ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से दो बार समय मांगा, पर कोई जवाब नहीं मिला। संगठन का कहना है कि डीसीपी सेंट्रल से बातचीत जारी है, और मौखिक रूप से उन्हें बताया गया है कि रैली की अनुमति नहीं दी जाएगी। DOMA ने लिखित आदेश मांगा है, जो अभी लंबित है।

संगठन का आरोप है कि “दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी समाज के लिए अलग नियम लागू किए जा रहे हैं। यह केवल अनुमति रोकने का मामला नहीं बल्कि समुदाय की सामाजिक आवाज़ को दबाने की कोशिश है।”

DOMA ने स्पष्ट किया कि
“रामलीला मैदान किसी की जागीर नहीं है। हमारा कार्यक्रम यहीं होगा।
देशभर से लोग टिकट, बस, ठहराव, टेंट, माइक, भोजन, बैनर–झंडे समेत भारी खर्च कर तैयारी कर चुके हैं। इस क्षति की भरपाई कौन करेगा?”

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने अनुमति से इनकार किया तो इसका देश-व्यापी प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि रैली में हजारों भीम सिपाही शामिल होने आ रहे हैं।

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