डीसीपी प्रशांत गौतम के नेतृत्व में साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़

मनीष सूर्यवंशी ( वीर सूर्या टाइम्स )
पूर्वी दिल्ली शाहदरा । दिल्ली –एनसीआर में फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भंडाफोड़ किया है। यह कार्रवाई डीसीपी (शाहदरा) प्रशांत गौतम के निर्देशन में की गई, जिसमें हरियाणा के हिसार से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने एक डॉक्टर से ₹22.70 लाख की ठगी की थी।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता डॉ. अमिता गर्ग को एक व्हाट्सऐप ग्रुप “Stan Chart Dialogue Forum L7” में जोड़ा गया था, जहां शेयर बाजार में निवेश से अधिक मुनाफे का दावा किया जा रहा था। ग्रुप की एक एडमिन द्वारा पीड़िता को SCIIHNW नामक फर्जी ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से निवेश का लालच दिया गया और ऐप का लिंक भेजकर इंस्टॉल करवाया गया।
शुरुआत में पीड़िता ने अलग-अलग तिथियों पर 11 लेनदेन के माध्यम से लगभग ₹2.70 लाख निवेश किए। बाद में जब उन्होंने राशि निकालने की कोशिश की, तो तकनीकी बाधाओं और अधिक मुनाफे का झांसा देकर उनसे और निवेश कराया गया। इस तरह पीड़िता से कुल ₹22.70 लाख की रकम ठग ली गई। इसके बाद आरोपियों ने ऐप और व्हाट्सऐप से पीड़िता को ब्लॉक कर दिया।
पीड़िता की शिकायत पर 13 नवंबर 2025 को ई-एफआईआर संख्या 29/2025, धारा 318(4)/340 बीएनएस के तहत थाना साइबर शाहदरा में मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा को सौंपी गई। एसीपी ऑप्स मोहींदर सिंह की निगरानी और एसएचओ विजय कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने बैंक ट्रांजैक्शन ट्रेल की जांच की।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक खाते में ट्रांसफर की गई थी। खाते के धारक की पहचान समीर (22 वर्ष), निवासी हिसार, हरियाणा के रूप में हुई। तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने 10 नवंबर 2025 को हिसार पहुंचकर समीर और देव सिंह (22 वर्ष) को हिरासत में लिया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि समीर ने अलग-अलग बैंकों में कई खाते खुलवाकर सह-आरोपी को सौंपे थे, जिसके बदले उसे प्रति खाता ₹4,000 मिलते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के माध्यम से खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ बताकर लोगों को फंसाते थे। पहले छोटी रकम पर फर्जी मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता जाता और बाद में बड़ी रकम निवेश कराकर पीड़ितों को ब्लॉक कर दिया जाता था।
डीसीपी प्रशांत गौतम ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान व्हाट्सऐप ग्रुप, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और गारंटीड मुनाफे के लालच से सावधान रहें तथा किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

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