दो जुड़वा भाइयों का प्लास्टिक-मुक्त भारत की ओर अनोखा अभियान

अंकित गर्ग (वीर सूर्या टाइम्स)
उत्तर पूर्वी दिल्ली के नेहरू विहार क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से दो मेहनती मुस्लिम जुड़वा भाई — मो. असलम और अकर्म क़ादरी — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के “स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त भारत” के सपने को साकार करने में जुटे हैं।
अपने अनुभव, लगन और तकनीकी दक्षता से उन्होंने “Nuzhat Bags” की स्थापना की — जो आज उच्च गुणवत्ता वाले जूट बैग निर्माण में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है।

15 वर्षों की मेहनत से बनी पहचान

असलम और अकर्म क़ादरी का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण जागरूकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
उनके अनुसार, “हर प्लास्टिक बैग के बदले एक जूट बैग का इस्तेमाल, आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ भविष्य की गारंटी है।”

आज Nuzhat Bags के पास 15 से अधिक वर्षों का तकनीकी अनुभव है, और यह कंपनी देशभर में पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के लिए जानी जाती है।

-हमारी विशेषताएँ

उत्तम क्वालिटी का जूट मटेरियल:
हर मटेरियल को कई स्तरों पर टेस्ट किया जाता है ताकि ग्राहकों को मिले सर्वोत्तम गुणवत्ता।

इन-हाउस प्रोडक्शन यूनिट:
प्रिंटिंग, कटिंग और सिलाई – सब कुछ Nuzhat Bags की अपनी फैक्ट्री में होता है, जिससे गुणवत्ता पर पूरा नियंत्रण रहता है।

उच्च उत्पादन क्षमता:
रोज़ाना 5000 से अधिक बैग तैयार करने की क्षमता, जो बड़े ऑर्डर्स को समय पर पूरा करने में सक्षम बनाती है।

गारंटी और भरोसा:
हर बैग की प्रिंटिंग, स्टिचिंग और मटेरियल क्वालिटी की पूरी गारंटी — जो ग्राहकों को न सिर्फ संतोष बल्कि दीर्घकालिक विश्वास भी देती है।

“प्लास्टिक मुक्त भारत” की दिशा में कदम

Nuzhat Bags की टीम न केवल बैग बनाती है, बल्कि घर-घर जाकर लोगों को प्लास्टिक से बचने की सलाह भी देती है।
उनका यह अभियान समाज में पर्यावरणीय चेतना जगाने का काम कर रहा है।
असलम और अकर्म क़ादरी का मानना है कि “सच्ची देशभक्ति वही है जो पर्यावरण और समाज दोनों के हित में हो।”

यदि आप भी स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल भारत के समर्थक हैं, तो Nuzhat Bags की फैक्ट्री ज़रूर देखें —
जहाँ गुणवत्ता, प्रतिबद्धता और हरियाली का सुंदर संगम देखने को मिलता है।

Nuzhat Bags न केवल एक ब्रांड है, बल्कि यह उस नए भारत की पहचान है जो स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर है।
यह कहानी बताती है कि अगर इरादा साफ़ हो, तो एक छोटे से प्रयास से भी देश बदल सकता है।

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