
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में जहां लोग बढ़ते तनाव, गलत खानपान और दवाओं पर बढ़ती निर्भरता के कारण कई बीमारियों से जूझ रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समाज को स्वस्थ जीवन की दिशा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।
ऐसे ही व्यक्तित्व हैं डॉ. राम सिंह माहौर, जिन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को ताकत बनाकर शिक्षा, सरकारी सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
“जल ही जीवन है” के संदेश को जीवन का आधार मानने वाले डॉ. माहौर प्राकृतिक चिकित्सा, योग और पंचतत्व सिद्धांत के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। लगभग चार दशकों की सरकारी सेवा के बाद भी उनका जीवन समाज सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए समर्पित है।
संघर्षों से भरा बचपन
डॉ. राम सिंह माहौर का जन्म 11 अगस्त 1948 को उत्तर प्रदेश के जिला आगरा के कस्बा एत्मादपुर में एक साधारण मजदूर परिवार में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय भोलेनाथ श्रमिक थे और माता श्रीमती राम देवी थीं। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण बचपन में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पढ़ाई के दौरान कई बार फीस जमा न होने के कारण उनका नाम स्कूल से काट दिया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से पढ़ाई जारी रखी।
वर्ष 1964 में मिडिल कक्षा में जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया और 1966 में हाईस्कूल में भी प्रथम रहे। आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें दूसरों की किताबों से पढ़ना पड़ा और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ी।
सरकारी सेवा की लंबी यात्रा
उनकी मेहनत रंग लाई और 1968 में डाक-तार विभाग में लिपिक के पद पर चयन हुआ।
23 जुलाई 1968 से उन्होंने सरकारी सेवा की शुरुआत की और लगभग 40 वर्ष 6 महीने तक विभिन्न पदों पर ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य किया।
नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने 1972 में इंटर, 1977 में बीए, 1982 में एमए और 1990 में एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। इसके अलावा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से 1998 में ज्योतिष आचार्य की उपाधि भी हासिल की।
सेवा काल के दौरान उन्होंने फर्रुखाबाद, हापुड़ और गाजियाबाद सहित कई स्थानों पर कार्य किया और दूरसंचार मंत्रालय में सहायक निदेशक एवं वरिष्ठ उपमंडल अभियंता के पद तक पहुंचे।
31 जनवरी 2008 को वे गाजियाबाद से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने समाज सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
अप्रैल 2008 से गाजियाबाद में वकालत के माध्यम से जनसेवा शुरू की और 2010 में “आदर्श शिक्षा ज्योति फाउंडेशन” की स्थापना कर शिक्षा, कला और संस्कृति के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया।
इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा की ओर कदम बढ़ाया और 2021–2023 में अखिल भारतीय चिकित्सा परिषद, राजघाट नई दिल्ली से नेचुरोपैथी का साढ़े तीन वर्षीय कोर्स पूरा किया।
उन्होंने उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी से योग में स्नातक (2025) भी किया।
15 अप्रैल 2024 को भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा संघ से चिकित्सक के रूप में पंजीकरण प्राप्त करने के बाद वे प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
फरवरी 2026 में “आदित्य आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र” की स्थापना कर उन्होंने दवा मुक्त भारत – स्वस्थ भारत के अभियान को आगे बढ़ाया।
इसी क्रम में वीर सूर्या टाइम्स के संपादक एम.एस. सूर्यवंशी (मनीष) ने उनसे विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ प्रमुख अंश—
विशेष बातचीत
प्रश्न: आपके जीवन के शुरुआती संघर्षों ने आपको क्या सिखाया?
उत्तर:
संघर्ष ही जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक होता है। संसाधनों की कमी के बावजूद मैंने शिक्षा नहीं छोड़ी। वही संघर्ष आगे चलकर मेरी सबसे बड़ी ताकत बना।
प्रश्न: सरकारी सेवा का अनुभव कैसा रहा?
उत्तर:
23 जुलाई 1968 को मैंने सरकारी सेवा शुरू की। लगभग 40 वर्ष 6 महीने तक डाक, टेलीग्राफ और संचार विभाग में काम किया। इस दौरान ईमानदारी, अनुशासन और जनसेवा को हमेशा प्राथमिकता दी।
प्रश्न: सेवानिवृत्ति के बाद प्राकृतिक चिकित्सा का मार्ग क्यों चुना?
उत्तर:
मैंने देखा कि लोग जीवनशैली सुधारने के बजाय दवाओं पर निर्भर हो रहे हैं। इसी चिंता ने मुझे योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया।
प्रश्न: “जल ही जीवन है” के संदेश को आप इतना महत्व क्यों देते हैं?
उत्तर:
जल शरीर की जीवन ऊर्जा है। शुद्ध और संतुलित जल सेवन शरीर को कई रोगों से बचाता है। जल का सम्मान करना ही स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी है।
प्रश्न: युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर:
आज की पीढ़ी को नशे और तनाव से दूर रहना चाहिए। प्रकृति से जुड़िए, योग और प्राणायाम अपनाइए और अपने शरीर की सुनिए।
अंतिम संदेश
डॉ. राम सिंह माहौर का मानना है कि मानव शरीर पंचतत्व—जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश— से बना है। जब इन तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, तब रोग उत्पन्न होते हैं।
वे कहते हैं—
“स्वास्थ्य को जीवन की पहली प्राथमिकता बनाइए,
प्रकृति के नियमों का सम्मान कीजिए और जीवन को सरल बनाइए।
याद रखें — Health is Wealth.”

