नई दिल्ली (वीर सूर्या टाइम्स)।
भारतीय इतिहास में पराक्रम, त्याग और धर्मनिष्ठा के प्रतीक माने जाने वाले सूर्यवंशी चक्रवर्ती महाराजा खट्वांग जी का नाम आज भी सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है। धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं के अनुसार महाराजा खट्वांग जी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी के पूर्वज थे और अपने समय के अत्यंत पराक्रमी सम्राट माने जाते थे। कहा जाता है कि उनकी वीरता और न्यायप्रिय शासन से संपूर्ण पृथ्वी पर उनकी कीर्ति फैली हुई थी।
इतिहासकारों के अनुसार महाराजा खट्वांग जी ने राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में खाटू गांव की स्थापना की थी। आगे चलकर उनके वंशजों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की स्थापना एवं पूजा-अर्चना की परंपरा प्रारंभ की गई, जिसके कारण यह स्थान खाटू श्याम जी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज खाटू श्याम जी का मंदिर आस्था का एक बड़ा केंद्र है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
महाराजा खट्वांग जी के वंश से उत्पन्न समाज को खटीक समाज के नाम से जाना जाता है। चूंकि महाराजा खट्वांग जी क्षत्रिय समाज से थे, इसलिए उनके वंशज स्वयं को आज ‘क्षत्रिय खटीक समाज’ के रूप में पहचानते हैं। समाज के बुजुर्गों का कहना है कि खट्वांग जी की परंपरा वीरता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की सीख देती है।
समाज के बुद्धिजीवियों और इतिहास प्रेमियों का मानना है कि महाराजा खट्वांग जी के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है, ताकि युवाओं में अपने गौरवशाली अतीत के प्रति सम्मान और संस्कार विकसित हो सकें। इसी उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा इतिहास पर चर्चा, संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

