मनीष सूर्यवंशी | वीर सूर्या टाइम्स
लोनी | गाजियाबाद
लोनी की तंग और संकरी गलियों में रहने वाला एक गरीब मजदूर परिवार आज न्याय की आस में भटक रहा है। मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली रेखा देवी के लिए रोज़ी-रोटी की तलाश उस वक्त एक भयावह सच्चाई में बदल गई, जब उनके नाबालिग बेटे की आंख की रोशनी गंभीर खतरे में पड़ गई।
रेखा देवी और उनके पति पिछले कई वर्षों से गीतांजलि विहार क्षेत्र में स्थित एक मकान में CFL/LED बल्ब तोड़ने का कार्य कर रहे थे। यह काम उनके लिए आजीविका का साधन था, लेकिन बाद में सामने आया कि यह स्थान दरअसल एक अवैध और बेहद खतरनाक फैक्ट्री थी। आरोप है कि यह फैक्ट्री विजयपाल सिंह द्वारा संचालित की जा रही थी, जहाँ कांच और रासायनिक पदार्थों के बीच बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूरों से काम कराया जाता था
वही पीड़ित परिवार का आरोप है कि 11 अगस्त 2025 को, जब रेखा देवी का पति घर पर मौजूद नहीं था, तभी आरोपी विजयपाल सिंह उनके घर पहुंचा। उसने रेखा देवी के दो नाबालिग बेटों—13 वर्षीय संदीप और 15 वर्षीय तुषार—को डराया-धमकाया गली गिलोज कर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया और जबरन फैक्ट्री ले गया। बच्चों को धमकी दी गई कि यदि उन्होंने काम करने से इनकार किया, तो उनके माता-पिता को कहीं भी मजदूरी नहीं करने दी जाएगी।
रेखा देवी के अनुसार फैक्ट्री में काम के दौरान संदीप की दाहिनी आंख में टूटे कांच और रासायनिक पदार्थ चले गए। दर्द से कराहते बच्चे को गंभीर हालत के बावजूद मामूली चोट बताकर घर भेज दिया गया। समय के साथ आंख की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और बच्चे की दृष्टि पर संकट गहराने लगा।
वही परिवार ने स्थानीय अस्पतालों से लेकर बड़े चिकित्सालयों तक इलाज कराया। आखिरकार संदीप को AIIMS ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने आंख की स्थिति को गंभीर बताते हुए सर्जरी की आवश्यकता जताई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने आरोपी विजयपाल सिंह से इलाज का खर्च उठाने की मांग की, तो उसने न केवल साफ इनकार कर दिया, बल्कि परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।
वही रेखा देवी का कहना है कि उन्हें करीब 5 महीनों तक थाने और अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े। लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी विजयपाल सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 118(2), 351(3), 352
एवं बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 3 और 14
के तहत मामला दर्ज किया है।
पीड़ित परिवार को अब उम्मीद है कि कानून उन्हें न्याय दिलाएगा और इस कार्रवाई से भविष्य में किसी और गरीब परिवार के बच्चों को ऐसे खतरनाक और अमानवीय हालातों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

