अल फ़लाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर और छात्रों की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता की कड़ी जाँच की मांग –

नई दिल्ली। यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट द्वारा आज नई दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर धरना प्रदर्शन कर एक ज्ञापन भारत के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को सौंप कर उसकी एक प्रति उपराज्यपाल दिल्ली, दिल्ली की मुख्यमंत्री व आयुक्त दिल्ली को देकर अल फ़लाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद से जुड़े व्यक्तियों की हाल ही में सामने आई संदिग्ध गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है। श्री गोयल ने कहा कि मुस्लिम गरीब, अनपढ़ युवा अत्तंकवाद की ओर झुकते हैं मगर 10 नवम्बर 2025 को दिल्ली धमाके में वाइट कालर आतंकी डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर पकड़े गए है। इसको अगर हम वाइट कलर जिहाद का नाम दें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी क्यूंकि इससे पहले भूमि जिहाद (वक़्फ़), लव जिहाद, वोट जिहाद, थूक जिहाद, पेशाब जिहाद इन जेहादियों द्वारा चलाये जा रहे है।
इस अवसर पर यूनाईटेड हिन्दू फ्रंट अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रवादी शिवसेना श्री जय भगवान गोयल ने कहा कि अल फ़लाह यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली हिन्दू लड़कियों को कुरान पड़ने, रोज़ा रखने व् हिज़ाब पहनने के लिए विशेष अंक दिए जाते हैं और मुस्लिम लड़को को हिन्दू लड़कियों से दोस्ती करवाई जाती हैं ताकि लव जिहाद के जरिये हिन्दू लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाया जा सके। अल फलाह का चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी मध्य प्रदेश से इंजीनियरिंग करके दिल्ली आया था और जामिया मिलिया में एक मामूली लेक्चरर था वहां वो वित्तीय फ्रॉड में 3 साल की जेल काट चूका है, देखते ही देखते वो अल फलाह ग्रुप के माध्यम से सॉफ्टवेयर, ऊर्जा और फाइनेंसियल 9 कंपनियों का मालिक बन गया। अल फलाह 1997 में इंजीनियरिंग कॉलेज की रूप में स्थापित हुआ था और 2013-14 में तात्कालिक हरियाणा कांग्रेस सरकार ने अल फलाह को यूनिवर्सिटी का दर्ज़ा दिया था। उस वक्त के नेताओं और अफसरों की भी जांच करवाई जाए जिन्होंने आतंकवाद की नर्सरी को मेडिकल कॉलेज के रूप में मान्यता दी थी।
उन्हांने कहा कि नासिर अल शाह जो जम्मू कश्मीर से तड़ी पार था वो अल फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिकल विभाग का प्रमुख कैसे बना दिया गया इसकी भी जांच होनी चाहिए। अल फलाह यूनिवर्सिटी से पिछले 10 सालों में करीब 400 डॉक्टर बनाये गए वो सारे के सारे आतंकियों की सरगना डॉक्टर शाहीन के संपर्क में हैं उनकी भी जांच होनी चाहिए। श्री गोयल ने कहा कि हमारा मानना हैं कि देश में जितने भी मुस्लिम डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर सरकारी पदों पर हैं उन सबकी NIA से जांच और उनको सरकारी पदों से हटाया जाये और गैर सरकारी संस्थानों व् कंपनियों में जो मुस्लिम डॉक्टर, प्रोफेसर और इंजीनियर हैं उन सबकी भी आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता की जांच करवाई जाए। जो भी आतंवादी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं उन सबको फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की माध्यम से फांसी की सजा दिलवाकर लाल किले की सामने खुले में फांसी दी जाए।
श्री गोयल ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए यह अत्यंत संवेदनशील विषय है। आतंकवाद का यह नया स्वरूप जहाँ उच्च शिक्षा प्राप्त पेशेवर और तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हों यह व्हाइट कॉलर जिहाद राष्ट्र के भविष्य के लिए अत्यंत खतरनाक है। श्री गोयल ने कहा कि लाल किले के सुसाइड बम डॉ. उमर के घर को बुलडोजर से गिराए जाने का उमर अब्दुल्ला, फारूख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती का विरोध करना खुलेआम आतंकियों व आतंकवाद का खुल्ला समर्थन है ऐसे लोगां पर भी राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

साभार - यूनाइटेड हिंदू फ्रंट  ऑफिस से

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