मनीष सूर्यवंशी( वीर सूर्या टाइम्स )
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा का शासन तबाही, अव्यवस्था, नाकामी और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। चाहे नोएडा हो, गुरुग्राम, फरीदाबाद या फिर दिल्ली—भाजपा शासित क्षेत्रों में लोगों को व्यवस्थित सुविधाएं देने के बजाय सरकारों की नाकामी के कारण नागरिकों की जान जा रही है।
उन्होंने नोएडा में निर्माणाधीन बेसमेंट में कार गिरने से युवक की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना जुलाई 2024 में दिल्ली के राजेन्द्र नगर स्थित कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन यूपीएससी छात्रों की डूबकर हुई मौत की याद दिलाती है। उसी दौरान गाजीपुर में खुले नाले में गिरने से 23 वर्षीय महिला और उसके बच्चे की मौत भी सरकारों की लापरवाही का उदाहरण है।
श्री यादव ने कहा कि वर्ष 2024–25 के दौरान दिल्ली में पानी से भरे गड्ढों और खुले नालों में डूबने से 89 लोगों की मौत, पिछले एक वर्ष में 1617 से अधिक सड़क हादसों में जानें गईं, जबकि वर्ष 2025 के मानसून में अब तक 11 मौतें हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े रेखा गुप्ता सरकार के तथाकथित विकसित दिल्ली प्लान की सच्चाई उजागर करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में आम आदमी पार्टी और पिछले एक वर्ष से भाजपा की सरकार ने दिल्ली की लगभग 38 हजार किलोमीटर सड़कों को दुरुस्त करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। राजधानी की अधिकांश सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। भाजपा सरकार द्वारा 25 जून को 1400 किलोमीटर लंबी सड़कों पर 3433 गड्ढों की मरम्मत के दावे को उन्होंने खोखला बताया।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि न्यू रोहतक रोड, पंजाबी बाग, जखीरा फ्लाईओवर, द्वारका, नजफगढ़, मुंडका, नांगलोई और पीरागढ़ी समेत दिल्ली की अधिकतर सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जो लगातार जानलेवा हादसों का कारण बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि रेखा गुप्ता सरकार सड़कों के निर्माण, खुले सीवर और नाले ढकने, गड्ढे भरने, ड्रेनेज सिस्टम सुधारने और दशकों पुरानी नालियों को बदलने की घोषणाएं तो बार-बार कर रही है, लेकिन इन पर अमल के लिए मंत्रिमंडल स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम को लेकर किए गए फैसलों पर भी अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।
श्री यादव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो अगले मानसून में कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही सरकार की नींद खुलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए, पीडब्ल्यूडी और दिल्ली नगर निगम को नालों की गाद निकालने का काम अप्रैल-मई की बजाय जनवरी से ही शुरू करना चाहिए, ताकि हर वर्ष दिल्लीवासियों को जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम की समस्या से बचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि जलभराव और टूटी सड़कों के कारण होने वाले हादसे सिर्फ मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनाधिकृत कॉलोनियों, पुनर्वास क्षेत्रों और झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में भी हालात बेहद खराब हैं, जहां सड़कें और जल निकासी दोनों ही गंभीर समस्या बनी हुई हैं।

