
पायल गुप्ता, वीर सूर्या टाइम्स
दिल्ली, नवरात्रि की गरबा–डांडिया की थाप पर जब दिल्ली के चार वृद्धाश्रमों के आँगन रंग और रोशनी से भर उठे, तो उम्र और अकेलेपन की सभी सीमाएँ टूट गईं।
वही ह्यूमनिफ़ाई फाउंडेशन ने श्री बालाजी कैलाश वृद्धाश्रम (कंझावला) में राजधानी का पहला ऐसा नवरात्रि डांडिया नाइट आयोजित किया, जिसमें आनंदम, त्रिवेणी देवी, श्री बालाजी कैलाश और रौनक वृद्धाश्रम के 150 से अधिक वरिष्ठ नागरिक एक साथ झूम उठे।
कार्यक्रम की शुरुआत शालीन की मधुर गणेश वंदना से हुई, जबकि मयूर सीवान और उनकी टीम के भक्ति व डांडिया गीतों ने माहौल को उत्सव में बदल दिया।
फाउंडेशन के संस्थापक एवं चेयरमैन निरज गेरा ने कहा आज की यह शाम बताती है कि मुस्कान और उत्सव की कोई उम्र नहीं होती। हम सबके लिए यह ऐतिहासिक पल है।”
वही विलायती राम (आनंदम ) कहते की “सोचा नहीं था कि फिर से डांडिया खेल पाऊँगा, आज दिल से जवान हो गया।”
वही गांधी ( त्रिवेणी देवी ) नें कहां “ऐसा लगा जैसे पूरा परिवार एक साथ त्योहार मना रहा हो। यह खुशी हमेशा मिलते रहे भगवान से प्रार्थना करते हैं
इसी कड़ी श्री बालाजी कैलाश वृद्धाश्रम के प्रमुख अनिल गुप्ता ने कहा – “वरिष्ठ नागरिकों को इतना सम्मान और प्यार एक साथ मिलते देखना अविस्मरणीय अनुभव है। यह रात हमेशा यादों में जिंदा रहेगी।”
गरबा–डांडिया की ताल पर बुज़ुर्ग, स्वयंसेवक और शुभचिंतक जब एक साथ थिरके, तो यह संदेश गूँज उठा “खुशियों और अपनापन की कोई उम्र नहीं होती।”


