भीम रैली को मंजूरी नहीं: दलित–ओबीसी–माइनॉरिटी एकता से सरकार डरी—डोमा परिसंघ

मनीष सूर्यवंशी (वीर सूर्या टाइम्स )
नई दिल्ली, रामलीला मैदान में 30 नवंबर को प्रस्तावित भीम रैली की अनुमति दिल्ली पुलिस ने रद्द कर दी है। पूर्व सांसद एवं डोमा परिसंघ (दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी संगठनों का परिसंघ) के चेयरमैन डॉ. उदित राज ने इसे “सुनियोजित रोक” और “सरकारी दबाव” का नतीजा बताया है।

डॉ. उदित राज के अनुसार, रैली के लिए आवेदन समय पर दिया गया था, लेकिन पुलिस ने “भारी भीड़ जुटने” और “हाई अलर्ट” का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व में ऐसे लगभग 20 बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन भीड़ का मुद्दा कभी बाधा नहीं बना। “ऐसा प्रतीत होता है कि डॉ. अंबेडकर और ‘भीम’ शब्द से सरकार को आपत्ति है,” उन्होंने आरोप लगाया।

परिसंघ ने कहा कि एमसीडी से 4 जुलाई को जारी एनओसी को डीसीपी कार्यालय में जमा किया गया था, लेकिन ‘फर्स्ट कम–फर्स्ट सर्व’ नियम का उल्लंघन करते हुए उसी अवधि के लिए किसी अन्य संगठन को अनुमति दे दी गई। लगातार संपर्क के बावजूद उन्हें अंतिम समय 24 नवंबर को ही रद्दीकरण की सूचना दी गई।

परिसंघ का आरोप है कि सरकार किसी भी हाल में इस रैली को रोकने के इरादे से काम कर रही थी।
डोमा परिसंघ के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट शाहिद अली ने कहा कि रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित थी, इसलिए सरकार नहीं चाहती कि दलित–ओबीसी–मुस्लिम एकजुट होकर संविधान और अधिकारों की लड़ाई लड़ें।

जेएनयू छात्र नेता कुनाल कुमार बिहारी ने कहा कि जेएनयू, जामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र बड़ी संख्या में डोमा से जुड़ रहे हैं, जिसे देखते ही “षड्यंत्रपूर्वक” अनुमति रद्द कर दी गई।
दिल्ली प्रदेश डोमा परिसंघ के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अंशु एंथोनी ने कहा कि ईसाई समुदाय, खासकर दलित और आदिवासी वर्ग, लगातार अत्याचार झेल रहे हैं और वे संविधान बचाने के हर संघर्ष के साथ खड़े रहेंगे।

राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर सतीश सांसी और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष परवेज़ आलम ख़ान ने कहा कि दिल्ली से सैकड़ों बसों में लोग संविधान बचाओ रैली में शामिल होने को तैयार थे। “जब डॉ. उदित राज सच बोलते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जाता है—सुरक्षा वापस लेना, घर का सामान फिंकवाना और अब रैली रोकना, इसी राजनीति का हिस्सा है,” उन्होंने कहा।

डोमा परिसंघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन शांति पूर्वक और संवैधानिक दायरे में चलाया जाएगा।
“देश का दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी वर्ग डॉ. उदित राज के साथ खड़ा है और रहेगा,” परिसंघ ने कहा।

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