मनीष सूर्यवंशी ( वीर सूर्या टाइम्स )
प्रयागराज। माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। संगम स्नान के लिए पहुंचे शंकराचार्य को पुलिस द्वारा रथ और पालकी सहित आगे बढ़ने से रोक दिए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। इसी बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने लगभग 200 शिष्यों के साथ रथ और पालकी पर सवार होकर संगम तट की ओर बढ़ रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया और पैदल स्नान करने का सुझाव दिया।
इस निर्णय को लेकर शंकराचार्य के शिष्यों ने विरोध जताया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति के जत्था लाया गया था और बैरिकेड तोड़े गए, जबकि शंकराचार्य पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बुजुर्ग संतों और बच्चों के साथ धक्का-मुक्की की।
घटना से आहत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम स्नान करने से इनकार कर दिया और संगम तट पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर साधु-संतों के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि यह संत समाज की गरिमा के खिलाफ है। उनके समर्थन में कंप्यूटर बाबा सहित अन्य संत भी धरने में शामिल हुए।
शंकराचार्य ने कहा कि संतों के साथ इस तरह का व्यवहार अत्यंत दुखद और निंदनीय है। उन्होंने योगी सरकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शासन व्यवस्था द्वारा धार्मिक परंपराओं की उपेक्षा की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पूर्व में भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर उनकी टिप्पणियां अक्सर सुर्खियां बनती रही हैं।

