
समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब शिक्षा, समानता और सेवा की भावना एक साथ आगे बढ़े। जब इन मूल्यों को दिशा देने वाली प्रेरणा डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्व से मिले, तो हर आयोजन एक नई चेतना का संदेश बन जाता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक आयोजन दिल्ली के सिविल लाइन स्थित सीएम श्री स्कूल में देखने को मिला, जहां संयुक्त अनुसूचित जाति जनजाति शिक्षक मंच दिल्ली द्वारा “डॉ. अंबेडकर गौरव सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन किया गया।
यह समारोह केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सामाजिक समरसता, शिक्षा के महत्व और मानव सेवा के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के संस्थापक श्री रामकिशन पूनिया जी ने की ,इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने में केन्द्रीय चेयरमेन सविता कादियान पंवार जी व उनकी टीम जिनके नेतृत्व में यह आयोजन अत्यंत प्रभावशाली रूप में संपन्न हुआ जिसमें राजेन्द्र प्रसाद ,रामकेश मीणा जी सुनीता केम ,संगीता सिंह ,जया सरकार ,राहुल गौतम,किशनलाल मीणा,बी के नंदा ऊदल सिंह,मोहित कुमार निगम विंग से सत्यप्रकाश,रणजीत प्रसाद,श्यामवीर,नंदकिशोर,के पी सिंह ,ललित धनखड़,प्रमोद जी सहित अनेकों साथियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।

सम्मान और प्रेरणा का संगम
समारोह के दौरान लगभग 50 शिक्षकों को “डॉ. अंबेडकर गौरव शिक्षक सम्मान” से सम्मानित किया गया। ये वे शिक्षक हैं जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देकर समाज को दिशा देने का कार्य किया है। इसके साथ ही 50 छात्र-छात्राओं को “डॉ. अंबेडकर छात्र गौरव सम्मान” प्रदान किया गया, जिससे युवाओं में शिक्षा के प्रति प्रेरणा और आत्मविश्वास का संचार हुआ।
विशेष रूप से, लगभग 30 दिव्यांगजनों को छड़ी, वॉकर और व्हीलचेयर प्रदान कर उनके जीवन को सहज और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय पहल की गई। यह कदम समाज में समावेशन और संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण बना।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बाबा साहब के विचारों—शिक्षा, समानता और संवैधानिक मूल्यों—का प्रसार करना था। साथ ही दिव्यांगजनों को सहयोग देकर समाज में उनके सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना भी इस कार्यक्रम की प्रमुख प्राथमिकता रही।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निदेशक श्री कौशल कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में उप शिक्षा निदेशक श्री सुधाकर भीमराव गायकवाड़ तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर श्रीमती ऋतु बाला मीणा शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व उप शिक्षा निदेशकगण और विभिन्न विभागों के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। कार्यक्रम की आयोजक सविता कादियान आए हुए सभी अतिथियों को धन्यवाद करते हुए बधाई दी
समारोह के दौरान बाबा साहब के जीवन, संघर्ष और उनके विचारों पर आधारित प्रेरणादायक प्रस्तुतियां दी गईं। वक्ताओं ने शिक्षा के महत्व, सामाजिक न्याय और समान अवसरों की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपस्थित जनसमूह को जागरूक किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन संयोजक श्री समय सिंह जौल द्वारा अत्यंत प्रभावशाली और ऊर्जावान ढंग से किया गया, जिसने पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।

सामूहिक प्रयास की सफलता
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में शिक्षा निदेशालय विंग, नगर निगम विंग तथा मंच के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सामूहिक सहयोग और समर्पण की भावना ने इस कार्यक्रम को एक यादगार उपलब्धि बना दिया।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए बाबा साहब के अमर संदेश—
“शिक्षित बनो, संगठित बनो, संघर्ष करो”
को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।

