

दिल्ली के शिव विहार, दिल्ली की निवासी रजनी सूर्यवंशी आज समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में एक सशक्त और सक्रिय नाम बन चुकी हैं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने अपने जीवन में जिम्मेदारियों और चुनौतियों को स्वीकार करते हुए समाज के लिए काम करने का रास्ता चुना।
बचपन से ही परिवार की सबसे बड़ी संतान होने के कारण उन्होंने जिम्मेदारियों को करीब से समझा और निभाया। यही अनुभव आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की मजबूती बना। शिक्षा-दीक्षा शिव विहार में ही हुई और विवाह के बाद भी उन्होंने सामाजिक कार्यों में अपनी सक्रियता बनाए रखी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए काम करना शुरू किया। वर्ष 2008 से वे सामाजिक संगठनों से जुड़ी रहीं और डॉ. उदित राज के नेतृत्व व विचारों से प्रभावित होकर समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी भागीदारी को और मजबूत किया।
“ओमकार जन कल्याण सेवा समिति” के माध्यम से उन्होंने जमीनी स्तर पर कई छोटे-बड़े सामाजिक कार्य किए। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखते हुए बहुजन समाज पार्टी से जुड़कर 2022 में नगर निगम चुनाव भी लड़ा। वर्ष 2025 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थामा और वर्तमान में बाबा साहब के मिशन को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
इसी कड़ी में वीर सूर्या टाइम्स के उप संपादक नरेंद्र सिंह ने उनसे विशेष बातचीत की।
पेश हैं इस खास इंटरव्यू के प्रमुख अंश:
रजनी सूर्यवंशी जी बताएं 14 अप्रैल (अंबेडकर जयंती) आपके लिए क्या महत्व रखती है , और इसके क्या मायने हैं
14 अप्रैल मेरे लिए केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का प्रतीक है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें समानता, शिक्षा और अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने समाज के सबसे वंचित वर्ग को आवाज दी और संविधान के माध्यम से हमें अधिकार दिलाए। इस दिन हम सिर्फ आदरांजलि नहीं देते, बल्कि यह संकल्प लेते हैं कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करेंगे और समाज में भेदभाव के खिलाफ लड़ते रहेंगे।
बाबा साहेब और ज्योतिबा फुले की विचारधारा को आप आज के समय में कैसे देखती हैं!
आज के समय में ज्योतिबा फुले और बाबा साहेब की विचारधारा पहले से भी ज्यादा प्रासंगिक हो गई है। फुले जी ने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया और समाज में महिलाओं तथा दलितों को पढ़ने का अधिकार दिलाया। वहीं बाबा साहेब ने हमें संविधान और कानूनी अधिकारों के जरिए सम्मानजनक जीवन जीने का रास्ता दिया। आज भी जब हम असमानता और भेदभाव देखते हैं, तो हमें इन महान विचारों को अपनाने की जरूरत और अधिक महसूस होती है।
आपके जीवन में समाज सेवा की शुरुआत कैसे हुई!
मेरे जीवन में समाज सेवा की प्रेरणा मेरे परिवार और मेरे पति से मिली। उन्होंने मुझे बाबा साहेब के विचारों से परिचित कराया और समाज के लिए कुछ करने की सोच विकसित की। धीरे-धीरे मैंने सामाजिक संगठनों से जुड़कर काम शुरू किया और लोगों की समस्याओं को करीब से समझा। यह अनुभव मेरे लिए एक सीख था कि समाज में बदलाव लाने के लिए जमीन पर काम करना कितना जरूरी है। बाबासाहेब डॉक्टर अंबेडकर के संघर्ष से सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिली
राजनीति में आने का आपका उद्देश्य क्या रहा!
राजनीति मेरे लिए सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का एक बड़ा प्लेटफॉर्म है। जब आप राजनीति में होते हैं, तो आप बड़े स्तर पर लोगों की समस्याओं को उठा सकते हैं और समाधान दिला सकते हैं। मेरा उद्देश्य हमेशा यही रहा है कि समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बनूं और उनके अधिकारों के लिए लड़ सकूं।
मैं कभी सत्ता का हिस्सा बनू या ना बनू लेकिन समाज के मुद्दे उठाते रहूंगी और जो सत्ता में लोग रहेंगे
उनसे हमेशा सवाल पूछता रहूंगी
और बिना सत्ता के जो मेरे से बन सकेगा वह में करती रहूंगी।
बहुजन समाज पार्टी से कांग्रेस तक का सफर कैसा रहा!
मेरा सफर सीख और अनुभवों से भरा रहा है। बहुजन समाज पार्टी से जुड़कर मैंने राजनीति की शुरुआत की और 2022 में नगर निगम चुनाव भी लड़ा। लेकिन समय के साथ मुझे लगा कि जिस विचारधारा के साथ मैं समाज के लिए काम करना चाहती हूं, वह मुझे कांग्रेस में ज्यादा प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने का मौका देती है। इसलिए मैंने 2025 में कांग्रेस जॉइन की और आज उसी के साथ काम कर रही हूं। कांग्रेस भारत की बड़ी पार्टी है
अगर भाजपा से मुकाबला कर सके तो कांग्रेस पार्टी ही है
बसपा बीजेपी का मुकाबला नहीं कर सकती। आदरणीय बहन जी दलित समाज की बात तो करती हैं लेकिन पहले जो बात मजबूती से रखती थी
आज के समय नहीं रख पा रही है बहन जी हमारे समाज की बड़ी नेता है मैं उन पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती लेकिन मुझे कभी-कभी ऐसा लगता है बहन जी या तो किसी के दबाव में काम कर रही हूं या फिर वर्तमान में दलितों का भला वह चाहती नहीं है
इसलिए मैंने कांग्रेस को चुना अगर देश का संविधान बचा सकती है तो कांग्रेस ही बचा सकती है बाबा साहब के मिशन को आगे बढ़ा सकती है तो कांग्रेस पार्टी ही बढ़ा सकती है। मुझे ऐसा लगता है जो गुलदस्ता मान्यवर कांशीराम साहेब जी ने सजाया था वह आज मुरझा गया है!जो बसपा पहले थी वह आज नहीं है वह मात्र एक जाति की पार्टी बनाकर रह गई ।
वर्तमान समय में दलित समाज की सबसे बड़ी समस्या क्या है!
आज भी दलित समाज शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। भले ही कानून बने हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी जरूरत है जागरूकता और एकजुटता की, ताकि समाज अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा हो सके। राहुल गांधी और डॉ उदित राज के नेतृत्व में हम सब मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं समाज को एकजुट होकर समाज में जल्दी बदलाव करेंगे।
- महिलाओं की भूमिका को आप समाज में कैसे देखती हैं!
महिलाएं समाज की रीढ़ होती हैं, लेकिन आज भी उन्हें बराबरी का अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाया है। खासकर दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हमें महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना होगा, तभी समाज में वास्तविक बदलाव संभव है।
युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है
युवाओं को सबसे पहले शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि शिक्षा ही उन्हें सशक्त बनाएगी। साथ ही उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और गलत के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। बाबा साहेब का सपना तभी पूरा होगा जब युवा जागरूक और संगठित होंगे।
आपके सामाजिक कार्यों की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही
मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि मैं लोगों की मदद कर पाती हूं और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान दिलाने की कोशिश करती हूं। “ओमकार जन कल्याण सेवा समिति” के माध्यम से हमने कई छोटे-छोटे कार्य किए, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक रहे।
आपका आगे का लक्ष्य क्या है
मेरा लक्ष्य है कि मैं समाज के हर वर्ग के लिए काम करूं और खासकर वंचित वर्गों को उनके अधिकार दिलाने में योगदान दूं। मैं चाहती हूं कि समाज में समानता और न्याय स्थापित हो और बाबा साहेब के सपनों का भारत बने। इसके लिए मैं लगातार समाज सेवा और राजनीति के माध्यम से काम करती रहूंगी।
रजनी सूर्यवंशी जी बताएं — महात्मा ज्योतिबा फुले को समानता और शिक्षा का अग्रदूत क्यों कहा जाता है!
महात्मा ज्योतिराव फुले एक महान समाज सुधारक थे, जिनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को सतारा में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और माली का कार्य करता था। बचपन में ही माता के निधन के बाद उनका पालन-पोषण सगुनाबाई ने किया।
ज्योतिबा फुले बचपन से ही शिक्षा के प्रति समर्पित थे, लेकिन जातिगत भेदभाव के कारण उन्हें विद्यालय छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आगे चलकर मिशनरी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षित कर भारत की पहली महिला शिक्षिका बनाया और वर्ष 1848 में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। उस समय यह कदम सामाजिक क्रांति से कम नहीं था।
फुले जी ने बाल विवाह का विरोध किया और विधवा विवाह का समर्थन किया। उन्होंने विधवाओं के लिए आश्रय स्थल बनाए और समाज के सभी वर्गों के लिए अपने घर के दरवाजे खुले रखे। उनका मानना था कि जाति व्यवस्था शोषण का मूल कारण है।
उन्होंने दलितों और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसने समाज में समानता और जागरूकता फैलाने का कार्य किया। उन्होंने बिना ब्राह्मण पुरोहित के विवाह की परंपरा शुरू कर सामाजिक कुरीतियों को चुनौती दी।
उनकी प्रसिद्ध पुस्तक गुलामगिरी आज भी सामाजिक न्याय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने किसानों की समस्याओं को भी उठाया और आर्थिक असमानता के खिलाफ आवाज बुलंद की।
उनके महान कार्यों के कारण 1888 में उन्हें “महात्मा” की उपाधि दी गई। 28 नवम्बर 1890 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी समाज को दिशा देते हैं।* *इसीलिए महात्मा ज्योतिबा फुले को समानता और शिक्षा का अग्रदूत कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और दलितों को शिक्षा और अधिकार दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
*रजनी सूर्यवंशी जी बताएं— भाजपा द्वारा महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की बात की गई, लेकिन संसद में बिल पास नहीं हुआ। कुछ दलों ने समर्थन नहीं किया। आप इसे कैसे देखती हैं*
सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि महिलाओं को 33% आरक्षण मिलना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी कदम है। और यह बिल 2023 में कांग्रेस या उन दिनों के सहयोग से संसद में पास भी हो चुका है हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि यह आरक्षण केवल एक घोषणा बनकर न रह जाए, बल्कि जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू हो।
अब तो भारतीय जनता पार्टी द्वारा महिलाओं के आरक्षण की बात आड़ में मात्र परिसीमन की बात की जा रही है यह भाजपा की सकारात्मक पहल है, इसके पीछे राजनीतिक सहमति की कमी और कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव भी जिम्मेदार है।
मेरा अपना मानना है कि महिलाओं का आरक्षण समावेशी (inclusive) होना चाहिए। इसका मतलब है कि 33% आरक्षण के भीतर ही SC, ST, OBC और आदिवासी महिलाओं के लिए अलग से हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिल सके।
अगर ऐसा नहीं किया गया, तो यह आरक्षण केवल कुछ वर्गों तक सीमित रह सकता है और जो महिलाएं पहले से वंचित हैं, वे पीछे ही रह जाएंगी।
हमारी मांग है कि:
आरक्षण में सामाजिक न्याय का संतुलन हो
SC/ST के साथ-साथ OBC महिलाओं के लिए भी स्पष्ट प्रावधान हो
यह कानून जल्द लागू हो, न कि केवल चुनावी वादा बनकर रह जाए
अंत में, मैं यही कहूंगी कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करने और सभी वर्गों को समान भागीदारी देने से होगा।
रजनी सूर्यवंशी जी वीर सूर्या टाइम्स के माध्यम से क्षेत्रीय जनता के लिए संदेश
मैं अपने क्षेत्र की समस्त जनता, विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग एवं आदिवासी बहन-भाइयों से यह कहना चाहती हूँ कि आज हम जो भी प्रगति कर रहे हैं, वह डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्ष और उनके द्वारा दिए गए संविधान की वजह से संभव हो पाया है। यदि बाबा साहेब ने हमारे अधिकारों के लिए लड़ाई न लड़ी होती, तो शायद आज भी हमारी स्थिति इतनी सशक्त न होती।
मैं अपने सभी युवाओं और युवतियों से अपील करती हूँ कि वे बाबा साहेब के संविधान को पढ़ें, अपने अधिकारों को समझें और शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ें। शिक्षा ही वह शक्ति है जो समाज को बदल सकती है और हमें एक बेहतर भविष्य दे सकती है।
सभी अभिभावकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि चाहे एक रोटी कम खा लें, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं। यही सबसे बड़ा निवेश है, जो आने वाली पीढ़ी को मजबूत बनाएगा।
अंत में, मैं वीर सूर्या टाइम्स का धन्यवाद करती हूँ, जो बाबा साहेब के मिशन को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ा रहा है। आप सभी को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।


