विधान परिषद में गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर, ‘वंदे मातरम’ पर योगेश नौहवार का उद्बोधन

नौहझील। विधान परिषद के शीतकालीन सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम’ पर चल रही चर्चा में भाग लेते हुए विधान परिषद सदस्य योगेश नौहवार ने इसे राष्ट्र की एकता, अखंडता और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज़ है।
एमएलसी योगेश नौहवार ने सदन में कहा कि 1875 में, जब देश गुलामी, महामारी और सामाजिक संकट से जूझ रहा था, तब बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम ने देशवासियों में नई चेतना और देशभक्ति का संचार किया। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत बना। उन्होंने कहा कि भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे वीर सपूतों ने इसी राष्ट्रप्रेम की भावना के साथ अपने प्राण देश पर न्यौछावर किए।
अपने संबोधन में योगेश नौहवार ने भारत रत्न चौधरी चरण सिंह को उनकी 123वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सच्चा किसान मसीहा बताया। उन्होंने कहा कि एक साधारण ‘घास-फूस की मढ़ैया’ से निकलकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना चौधरी चरण सिंह की सादगी, संघर्ष और किसान-प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने चौधरी साहब को महात्मा गांधी की अर्थनीति और सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रशासनिक सोच का सच्चा अनुयायी बताया।
एमएलसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसान सम्मान समारोह के अंतर्गत 25 किसानों को ट्रैक्टर वितरण, लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क तथा बाराबंकी में टिश्यू कल्चर पार्क का उद्घाटन प्रदेश के किसानों के लिए ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम हैं।
अपने वक्तव्य के अंत में योगेश नौहवार ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि वतन पर बलिदान देने वालों का नाम इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा और आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी।

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